




सरकार अब राज्य के हर गांव में ‘नागरिक रजिस्टर’ तैयार करने की दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ा रही है। इस फैसले को प्रशासनिक सुधार और जनसांख्यिकीय नियंत्रण की दिशा में एक बड़ा और अहम कदम माना जा रहा है।
सरकार का उद्देश्य गांवों में रह रहे मूल निवासियों, बाहर जाने वालों और नए आने वाले लोगों का सटीक रिकॉर्ड रखना है, जिससे अवैध घुसपैठ या संदिग्ध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके।
सूत्रों के अनुसार, यह नागरिक रजिस्टर प्रत्येक पंचायत स्तर पर तैयार किया जाएगा और इसका पूरा डेटा एक फिजिकल रजिस्टर में दर्ज किया जाएगा। गांवों के सचिव और पंचायत कर्मी स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मदद से इस कार्य को अंजाम देंगे। रजिस्टर में हर व्यक्ति का नाम, उम्र, लिंग, जाति, पेशा, स्थायी निवास का विवरण और गांव में आने या बाहर जाने की तारीख दर्ज की जाएगी।
राज्य सरकार का मानना है कि गांवों में जनसंख्या की आवाजाही का कोई स्थायी और व्यवस्थित रिकॉर्ड नहीं होने के कारण कई बार अवैध घुसपैठ, फर्जी राशन कार्ड, फर्जी वोटर आईडी और आपराधिक गतिविधियों की पहचान करना मुश्किल हो जाता है। इस रजिस्टर के जरिए न केवल स्थानीय प्रशासन को यह जानकारी रहेगी कि गांव में कौन रह रहा है और किस उद्देश्य से आया है, बल्कि यह डेटा सुरक्षा और योजनाओं के क्रियान्वयन में भी उपयोगी होगा।
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि कई सीमावर्ती और अर्ध-शहरी गांवों में बाहर से आकर बसने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिनका न तो स्थायी निवास प्रमाण है और न ही कोई पहचान। इससे कई बार कानून-व्यवस्था की स्थिति भी बिगड़ती है। नागरिक रजिस्टर ऐसी स्थिति से निपटने के लिए एक प्रभावी उपाय साबित हो सकता है।
इस पहल को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोगों का कहना है कि इससे योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंचेगा और नकली लाभार्थियों की पहचान हो सकेगी, वहीं कुछ लोग इसे निगरानी व्यवस्था के रूप में भी देख रहे हैं। हालांकि, प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस रजिस्टर का उद्देश्य केवल सामाजिक व प्रशासनिक नियंत्रण और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है, न कि किसी की निजता का हनन।
राज्य सरकार की योजना है कि इस नागरिक रजिस्टर को भविष्य में डिजिटल फॉर्मेट में भी बदला जाए और इसे अन्य विभागों से जोड़ा जाए, जिससे योजनाओं की मॉनिटरिंग और जरूरतमंदों की पहचान और आसान हो सके।
कुल मिलाकर, छत्तीसगढ़ सरकार की यह पहल गांवों में पारदर्शिता, सुरक्षा और योजनाओं की दक्षता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जिससे न केवल प्रशासनिक नियंत्रण मजबूत होगा बल्कि आम जनता को भी दीर्घकालिक लाभ मिल सकेगा।
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