




11 जून 2025 को छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा प्रदेश की 10,463 शालाओं को युक्तियुक्तकरण कर मार्ज करने की नई शिक्षा नीति के खिलाफ हसौद परिक्षेत्र में युवाओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। अंबेडकर चौक से पैदल मार्च करते हुए युवाओं ने भाजपा सरकार की “गूंगी-बहरी” नीतियों के खिलाफ नारेबाजी की और शिक्षा बचाओ आंदोलन को मजबूती दी।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह नीति दलित, आदिवासी, पिछड़े, मजदूर और वंचित समाज के बच्चों को शिक्षा से वंचित करने की साजिश है। “शिक्षा है तो हम हैं” के नारों के साथ युवाओं ने चेताया कि शिक्षा छीनकर सरकार हमें कमजोर बनाना चाहती है, ताकि हमें सवाल उठाने से रोका जा सके।
प्रदर्शन के दौरान युवाओं ने 10 जून 2024 को बलौदाबाजार में जेल भेजे गए निर्दोष सतनामियों पर लगे झूठे मुकदमों को वापस लेने की भी मांग की। इस संबंध में महामहिम राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन तहसीलदार को सौंपा गया।
युवाओं ने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा को बंद कर शराब को बढ़ावा दे रही है ताकि जनता को गुमराह कर उन पर राज किया जा सके। उन्होंने आह्वान किया कि बाबा साहेब अंबेडकर के विचारों को ज़िंदा रखते हुए हर अन्याय के खिलाफ आवाज़ बुलंद करें।

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