




छत्तीसगढ़ में बहुचर्चित आबकारी घोटाले की जांच में एक और बड़ा मोड़ सामने आया है। पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा की संलिप्तता के आरोपों के तहत आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने शुक्रवार को राज्य के पाँच जिलों — रायपुर, जगदलपुर, अंबिकापुर, दंतेवाड़ा और सुकमा — में 13 स्थानों पर एक साथ छापेमारी की।
ब्यूरो द्वारा दर्ज अपराध क्रमांक 04/2024 में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7, 12 और भारतीय दंड संहिता की कई गंभीर धाराओं — 420, 467, 468, 471, 120बी — के तहत मामला दर्ज है। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि तत्कालीन मंत्री कवासी लखमा ने सिंडीकेट सदस्यों के साथ मिलकर अवैध लाभ उठाया और उसे अपने करीबी लोगों और साझेदारों के माध्यम से निवेश किया।
छापे की कार्रवाई में लखमा से जुड़े ठिकानों से 19 लाख रुपये नगद, मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, कई बैंक खातों के दस्तावेज, और जमीनों में निवेश से संबंधित कागजात जब्त किए गए हैं। सभी दस्तावेजों की जांच जारी है और EOW ने संकेत दिए हैं कि इस मामले में और भी खुलासे हो सकते हैं।
सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई कवासी लखमा के नजदीकी लोगों पर केन्द्रित थी, जिनके पास कथित रूप से घोटाले से जुड़ा अवैध धन छिपाया गया था। दस्तावेज़ों के विश्लेषण और बैंक ट्रांजेक्शन की जाँच के आधार पर आगे की क़ानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। EOW ने संकेत दिए हैं कि आगे भी इस मामले में और ठिकानों पर कार्रवाई हो सकती है। सौजन्य
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