सक्ती जिला किसान जैविक खेती की ओर अग्रसर, स्वास्थ्य संरक्षण व पर्यावरण संतुलन में बढ़ा योगदान।

जैविक खेती की ओर अग्रसर हो रहा सक्ती जिला

 

सक्ती, 19 सितम्बर 2025// जिला सक्ती जैविक खेती की ओर अग्रसर हो रहा है। भविष्य के नव निर्माण में आशान्वित उद्यानिकी फसलों के माध्यम से जिले के किसान धीरे-धीरे आगे कदम बढ़ा रहे है। जिले के उद्यानिकी विभाग के अधिकारी इस हेतु किसानों को सतत् सकारात्मक मार्गदर्शन करते आ रहे है। विकासखण्ड जैजैपुर अंतर्गत ग्राम चिस्दा निवासी श्री बाबू लाल राकेश आपने एक एकड़ क्षेत्र में बैगन की जैविक खेती कर रहे है। इसी प्रकार जाजंग व सक्ती जिले को कृषि क्षेत्र में गौरवान्वित करने वाली महिला किसान श्रीमती सुशीला गबेल अपने गृह बाड़ी में लौकी, कुंदरु, आम की जैविक खेती कर सक्ती जिलें के किसानों को जैविक खेती करने की दिशा में प्रोत्साहित कर रही है। इसी तरह सक्ती जिलें के अन्य किसान भी जैविक खेती की ओर अग्रसर हो रहे है और प्राप्त उत्पादों का विक्रय कर लाभान्वित हो रहे है।

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ कृषि प्रधान राज्य है, यहाँ की लगभग 70 से 75 प्रतिशत आबादी का मुख्य व्यवसाय कृषि है, समान्यतः किसान अधिक लाभ अर्जित करने के लिए अत्यधिक मात्रा में रासायानिक उर्वरकों एवं किटनाशकों का उपयोग करता है, जिससे उत्पादन तो अधिक प्राप्त होता है, लेकिन इस विषाक्तयुक्त खाद्य पदार्थो का सेवन करने से लोगों के स्वास्थ्य में गिरावट हो रही है, आये दिन लोग नये-नये बिमारियों से ग्रसित हो रहे है, फिर इन बिमारियों के इलाज हेतु आय से अधिक खर्च करना पड़ रहा है। रासायानिक उर्वरकों के माध्यम से खेती करने से मनुष्य का जीवन प्रभावित तो हो रहा है साथ ही साथ पर्यावरण प्रदूषित हो रहे है एवं अन्य कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इन समस्याओं से बचने का केवल एक ही रास्ता है, खेती के तरीके में सुधार करना वह केवल जैविक खेती के माध्यम से ही संभव है, जैविक खेती करने से लागत कम मुनाफा भी अधिक होता है, जैविक खेती से मिट्टी की संचरना एवं उपजाऊपन लंबे समय तक बने रहते है एवं वातावरण भी प्रदूषित नहीं होता है। जैविक खेती से प्राप्त उत्पादों का सेवन करने से स्वास्थ्य भी सुधार होता है।

 

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